जवाबदेह व्यवस्था बनाने की जरूरत : हमारा देश विकसित देशों की श्रेणी में नहीं गिना जाता

उन्नीसवीं शताब्दी में विश्व के ज्यादातर देशों को स्वतंत्रता मिली और इन देशों में लोकतांत्रिक व्यवस्था लागू हुई, तभी से पूरा विश्व विकास की दृष्टि से विकसित, विकासशील एवं आर्थिक रूप से पिछड़े देशों की श्रेणी में बंटा हुआ है। भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक, सैनिक तथा आर्थिक दृष्टि से एक मजबूत तथा शक्तिशाली देश है, परंतु हमारा देश विकसित देशों की श्रेणी में नहीं गिना जाता है।


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वह अब भी विकासशील श्रेणी में ही है। लंबे समय से देश के नेता भारत को विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में लाने के सपने देशवासियों को दिखा रहे हैं। शक्तिशाली सेना तथा मजबूत होती आर्थिक व्यवस्था होने के बावजूद यह सपना हकीकत से दूर है।

शासन के साथ ही कानून व्यवस्था और नागरिक सुविधाओं जैसे मानकों में पिछड़ने के कारण देश के कई राज्यों को पिछड़ा माना जाता है। ठीक इसी तरह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गुणवत्ता के मानक तय हैं। आंतरिक कानून व्यवस्था और आर्थिक भ्रष्टाचार तथा घोटालों के कारण हमारा देश उन मानकों में पिछड़ा हुआ है, जिनके कारण कोई देश विकसित देश कहा जाता है। हमारे देश के मानक गुणवत्ता से रहित हैं और इनमें ज्यादातर शार्टकट तथा जुगाड़ आदि का प्रयोग होता है। इस कारण अक्सर देश की विकास तथा जनकल्याण की योजनाओं में घपले तथा भ्रष्टाचार दिखाई देते हैं।

इससे कभी-कभी यही विकास की योजनाएं विनाश की योजना नजर आने लगती हैं। उदाहरण के लिए पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आने वाले शहरों जैसे गुुरुग्राम तथा ग्रेटर नोएडा में व्यवस्थित विकास के लिए विकास प्राधिकरण गठित किए गए। इन प्राधिकरणों का मुख्य उद्देश्य है कि ये सब विकास के इंजन के रूप में काम करके इन शहरों का व्यवस्थित औद्योगिक तथा आवासीय और पूरे क्षेत्र में अच्छी यातायात व्यवस्था का विकास करें। इसके लिए इस पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के विकास के लिए मास्टर प्लान 2021 बनाया गया।


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