गोडसे जिंदाबाद रहेंगे तो मरेगा कौन? गांधी मरेगा, अहिंसा मरेगी, निर्दोष मरेंगे और हत्यारे राज करेंगे: पत्रकार

 


हर बार गांधी जयंती को ट्विटर पर गोडसे ट्रेंड कराए जाते हैं. आईटी सेल और ट्रोल आर्मी हत्यारे नाथूराम का गुणगान करते हैं और गांधी के बारे में अनाप शनाप बकते हैं। संघी कुनबे के लोग इतने गिरे हुए और इतने निकृष्ट हैं कि अपने ही देश के महानायक की हत्या की, मिठाई बांटी, और 70 साल से उन्हें गालियां दे रहे हैं। सोचिए कि इनका दिल दिमाग कैसा जिसमें 7 दशक से नफरत भरी है! वे आज भी गोडसे जिंदाबाद कर रहे हैं।
गोडसे जिंदाबाद रहेंगे तो मरेगा कौन? गांधी मरेगा. सत्य मरेगा. अहिंसा मरेगी. आम जनता मरेगी. गरीब गुरबा मरेंगे. वंचित मरेगा. हत्यारा अमर रहेगा तो निर्दोष मरेंगे और हत्यारे राज करेंगे. लेकिन ठहरिए! आप मूर्ख हैं। गांधी कभी मरता नहीं। संघियों के पोस्टर बॉय अभी अभी अमेरिका से तमाचा खाकर लौटे हैं। वे पूरे विश्व मे जहां भी गए, उनके पास गांधी और बुद्ध के अलावा अगर कुछ था तो भारत का लोकतंत्र था जिसे वे बेतहाशा रौंद रहे हैं।
क्या आपको पता है कि गांधी को अपमानित करके आप आसमान पर थूक रहे हैं जो लौटकर आपके मुंह पर आएगा?
जिस ट्विटर पर ये ट्रेंड कराया जाता है, वहीं पर भारत के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति समेत पूरी सरकार मौजूद है. ​क्रिकेटर के अंगूठे पर ट्वीट करने वाले प्रधानमंत्री ने गांधी की गरिमा को बार बार खंडित किए जाने पर कभी शोक व्यक्त नहीं किया.
उसी ट्विटर पर संपूर्ण विपक्ष मौजूद है. उसी ट्विटर पर ​नेताओं और पार्टियों के पालतू आईटी सेल वाले गोडसे का अमरत्व ट्रेंड करवाते हैं. वे अमेरिका और यूरोप में जाकर गांधी और बुद्ध को बेचते हैं, अपने यहां गोडसे जिंदाबाद का नारा लगवाते हैं. जो सरकार ट्विटर को ट्वीट हटाने के फरमान जारी करती रहती है, वह ट्विटर पर ऐसे ट्रेंड क्यों नही रोकती?
गांधी अपनी हत्या से भी खुश हैं. गांधी अपनी महानता के लिए कुछ कठमुल्लों के मोहताज तब भी नहीं थे, आज भी नहीं हैं. गांधी अपनी मौत से पहले ही विश्वपुरुष थे, गांधी मरने के बाद भी दुनिया के भविष्य की एक शांतिपूर्ण आशा हैं. महानता थोपी नहीं जाती, अर्जित की जाती है. गांधी ने वह अर्जित की थी.
गांधी के हत्यारे को आप अपना देवता बना लें, इससे गांधी को कोई फर्क नहीं पड़ता. इससे सिर्फ आपको फर्क पड़ता है. आप नकारते रहिए कि गांधी कुछ नहीं है, लेकिन इस दुनिया के रहने तक ये सच नहीं बदल सकता कि गांधी की अगुआई में भारत आजाद हुआ था. आप लोकतांत्रिक भारत में एक हत्यारे को देवतुल्य घोषित करेंगे तो आपकी आस्था कलंकित होगी. आप उसे राष्ट्रनायक घोषित करेंगे तो राष्ट्र क​लंकित होगा.
सत्ता सुख भोग रहीं पापी आत्माएं गांधी नाम का सहारा लेकर वैतरिणी पार करने की कोशिश करती हैं. पीछे से आवारा भीड़ को तैनात कर रखा है जो गोडसे जिंदाबाद का नारा लगा रही है. वे हाथ जोड़े गांधी के आगे खड़े हैं और यह हत्यारा शोर सुनकर मन ही मन आह्लादित हैं. अगर ऐसा न होता तो यह नारा लगाने वाली भीड़ निरंकुश नहीं होती.
गांधी की जरूरत सत्ता के लुटेरों को नहीं है. गांधी की जरूरत कांग्रेस और भाजपा को नहीं है. वे दोनों सत्ता के लिए गांधी का इस्तेमाल कर रहे हैं. जब फायदा होगा नारा लगाएंगे, जब फायदा देखेंगे गोली मार देंगे. वे देश में सांप्रदायिक विभाजन के लिए गांधी का इस्तेमाल कर रहे हैं. वे गांधी जयंती भी मना रहे हैं और गांधी जयंती के ​बहाने फिर से गांधी पर गोलियां भी दाग रहे हैं.
 

गांधी सत्ता के लुटेरों के नायक नहीं थे. गांधी आम जनता के नायक थे और रहेंगे. आपको भूखा देखा तो भूखे रहे, आपको नंगा देखा तो वस्त्र त्याग दिया. आपको गुलाम देखा तो दुनिया की सर्वश्रेष्ठ सत्ता से जा भिड़े और जीवन भर लड़े. अगर आप भी गांधी को अपना मानते हैं तो आप बचाइए गांधी को. अगर आपको गोडसे प्रिय हैं तो ये मूर्खता आपको मुबारक!
दुनिया भी ये देख रही है कि जिस भारतीय महापुरुष की आज भी दुनिया कायल है, भारतीय उनके साथ कैसा सुलूक करते हैं!
 

यह सब देखकर सिर्फ व्यथित हुआ जा सकता है. लेकिन याद रखिए, गांधी अब विचार है और विचार कभी नहीं मरता। तुम अपनी नफरत में घुल कर मर जाओगे, गांधी अमर रहेगा।
महात्मा गांधी अमर हैं!
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