कांग्रेस में कन्हैया कुमार के शामिल होने का मतलब-अजीत श्रीवास्तव

 

अजीत श्रीवास्तव

हिंदी दैनिक आज का मतदाता कन्हैया कुमार  28  सितम्बर 2021  को कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए। कन्हैया कुमार ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि वह कांग्रेस पार्टी में इस लिए शामिल हुए हैं क्योंकि वह जानते हैं कि वर्तमान समय में अगर कोई पार्टी देश को बचा सकती है तो वह कांग्रेस है। उन्होंने और आगे जाकर यह भी कहा कि सिर्फ वह ही नहीं उनके जैसे लाखों नौजवान भी इस बात को समझ गए हैं कि देश का भविष्य कांग्रेस के हाथों में ही सुरक्षित है।  अब प्रश्न यह उठता है कि कन्हैया कुमार को उस कांग्रेस के प्रति यह विश्वास कैसे जगा जो सवय को पंजाब में बचने के लिए संघर्ष कर रही है। पंजाब में कांग्रेस पार्टी के भीतर बढ़ते राजनितिक कलह से कांग्रेस अपने आप को को इतना असहाय मान रही है कि पंजाब में वर्तमान स्थितियों में कांग्रेस हाई कमान ने स्वयं को बिलकुल अलग थलग कर लिया है। कांग्रेस पार्टी के कई शीर्ष नेता जैसे कपिल सिब्बल, गुलाम नबी आजाद, नटवर सिंह, आन्नद शर्मा और G23 ग्रुप के अन्य कई नेताओं ने पार्टी हाई कमान के निर्णयों और वर्तमान ढांचे को लेकर प्रश्न उठाएं हैं। इसी बीच गोवा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता फलेरियो भी कांग्रेस छोड़कर TMC में शामिल हो गए हैं।  छत्तीसगढ़ से भी कांग्रेस के लिए अच्छी खबरें नहीं आ रही हैं। ऐसी परिश्थिति में जब कांग्रेस पार्टी खुद इतनी कमजोर दिख रही हो और कई अंतर् कलह से जूझ रही हो, कन्हैया कुमार का कांग्रेस के प्रति आत्मविश्वाश, खुद कन्हैया कुमार की समझ पर प्रश्नचिन लगता है। कन्हैया कुमार ने एक और बात कही कि भारत में लोकतंत्र को बचाने के लिए कांग्रेस को बचाना जरुरी है क्योंकि कांग्रेस के कमजोर होने से विपक्ष कमजोर हो गया है, जिससे देश का लोकतंत्र खतरे में है। यह बात समय समय पर और भी  कई नेता कहते रहते हैं। परन्तु मेरी समझ में यह नहीं आता कि भारत की जनता जब इतनी मजबूती के साथ, बिना किसी संदेह के एक पार्टी को चुनती है  तो वह देश का लोकतंत्र मजबूत करती है या फिर वह किसी पार्टी को बिलकुल दरकिनार कर देती है तो वह देश का लोकतंत्र कमजोर करती है। मेरे विचार से जब जनता मजबूती के साथ, बगैर किसी संदेह के एक पार्टी के पक्ष में फैसला देती है तो निःसंदेह वह देह का लोकतंत्र मजबूत करती है और जो भी इस विचार से सहमति नहीं रखता वह देश के लोकतंत्र के खिलाफ जाकर देश की जनता के जनादेश का अपमान करता है और देश को कमजोर करने का काम करता है। आखिर कब तक कमजोर विपक्ष का हवाला देकर कांग्रेस अपने लिए वोट मांगने और देश की जनता को भ्रमित करने का प्रयास करेगी। जबकि हकीकत यह है कि कांग्रेस के भीतर ही लोकतंत्र का अंत हो चूका है।

अब बात करते है कांग्रेस के  उस सोच की जिसके तहत कांग्रेस ने कन्हैया कुमार को पार्टी में शामिल किया।  सभी जानते हैं की कन्हैया कुमार किन कारणों से देश की नजर में आये। JNU में जो उन्होंने देश विरोधी बातें कही वह जग जाहिर हैं। उन्हें रातों रात चर्चा में लाने में कहीं न कहीं हमारे देश की मीडिया का भी दोष है। देश के हर प्रतिष्ठित चैनल में JNU कांड के बाद कन्हैया कुमार को अपने डिबेट शो में लाने की होड़ हो गई थी और जिसका फायदा कन्हैया कुमार ने दोनों हाथों से उठाया। हमारे देश की राजनितिक पार्टियों की यह खाश विशेषता है कि वह हर चर्चित आदमी को अपने पार्टी में टिकट देने को लालाइत रहती हैं , चाहे उस व्यक्ति विशेष के चर्चित होने का कारण उचित हो या अनुचित। कन्हैया कुमार को भी इसी पालिसी के चलते 2019 लोकसभा चुनाव में सीपीआई ने बेगुसराई से टिकट दे दिया। परन्तु देश कि जनता सीपीआई पार्टी से ज्यादा समझदार निकली और कन्हैया कुमार अपने गृह जिले में ही बुरी तरह से चुनाव हर गए। अब उसी कन्हैया कुमार में जो अपने गृह जिले में चुनाव हार गए थे, अपने छात्र जीवन में देश विरोधी गतिविधियों में शामिल हुए, देश के सैनिको के विरोध में वक्तव्य दिए,पटना के अस्पताल में एक डॉक्टर से दुर्व्यवहार किया, न जाने कांग्रेस ने क्या प्रतिभा देखी कि उन्हें गुजरात विधानसभा चुणाव में अपना चेहरा बनाने का निर्णय ले लिया।
मेरे विचार से कन्हैया कुमार और कांग्रेस पार्टी का मिलन एक ऐसी पार्टी और ऐसी व्यक्ति का मिलन है जो दोनों ही सही निर्णय लेने का क्षमता खो चुके हैं और अपने फायदे के लिए ( जो कि उन्हें लगता है कि ऐसा करने से हमें फायदा होगा जबकि हकीकत इससे कोसो दूर है) किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं और अपनी विचाधारा और अपने मूल्यों से भी समझौता करने से भी उन्हें परहेज नहीं है।

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