भाजपा नेता बोला कोयले की जगह उदित राज का इस्तेमाल कर लो, पत्रकार बोले- RSS के इस नमूने को जेल में डालो

 


देशभर में कोयले का संकट गहराता जा रहा है। फिर भी सरकार का दावा है कि कोयले की कोई कमी नहीं है। इसी कड़ी में कोयले संकट पर भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संतोष रंजन राय ने कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और दलित नेता डॉ. उदित राज पर ऐसी आपत्तिजनक टिप्पणी की है, जिसने केंद्र सरकार पर सवाल खड़ा कर दिया है। संतोष रंजन ने उदित राज पर जातिगत और रंगभेदी टिप्पणी करते हुए ट्वीट किया है कि “सरकार ने कह दिया है कोयले कोई कमी नहीं है, फिर भी अगर कहीं भी कोयला की कमी हो तो डॉ. उदित राज का इंधन में उपयोग कर सकते हैं।”संतोष रंजन के इस बयान का चौतरफा विरोध हो रहा है, क्योंकि उन्होंने विपक्ष के एक दलित नेता पर इस तरह की रंगभेदी टिप्पणी की है। भारतीय राजनीति में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना क्या किसी नेता को शोभा देता है। सोशल मीडिया पर यह ट्वीट वायरल हो रहा है औऱ लोग इस मामलें में कड़ी प्रतिक्रिया दे रहे है। पत्रकार दिलीप मंडल ने संतोष रंजन के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया है कि “ये आदमी आपराधिक मानसिकता का है।इसे रिपोर्ट कीजिए। डॉक्टर उदित राज बड़े नौकरशाह रहे हैं, पीएचडी हैं, पूर्व सांसद हैं। ऐसे स्थापित व्यक्ति पर अगर ऐसी टिप्पणी की जा सकती है, तो बाक़ी लोगों के साथ ये क्या तो नहीं करता होगा। ये आरएसस का ट्रैंड आदमी है। इसे जेल में होना चाहिए”।वहीं पत्रकार मीना कोतवाल ने इसपर प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया है कि “पीएम नरेंद्र मोदी साहब, संतोष रंजन ने आपके साथ कवर फोटो लगाई हुई है और रंगभेदी बातें कर रहा है। खुद को BJP नेता बताने वाला यह शख्स पूर्व सांसद डॉ. उदित राज के बारे में आपत्तिजनक बात लिख रहा है। विपक्ष के दलित नेता के प्रति यह भाषा अस्वीकार्य है, इनपर एक्शन लें”।एक ट्वीटर यूजर शैलेश कुमार यादव ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया है कि “06 नवम्बर 1913 को गांधी जी ने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद की नीतियों के खिलाफ ‘द ग्रेट मार्च’ का नेतृत्व किया था। 

 


नेल्सन मंडेला जी ने रंग भेद के खिलाफ अभियान चलाया था और सफ़लता भी मिली। भारत में उसी रंगभेद और नस्लभेद की परंपरा को आरएसएस और भाजपा आगे बढ़ा रही है। अभी कितना गिरोगे।?”बता दें कि हाल ही में बीजेपी शासित प्रदेश यूपी के सीएम योगी ने मंत्रिमंडल का विस्तार करते समय उपदेशात्मक लहजे में कहा था कि ‘आप सभी याद रखना, अनुसूचित जाति समाज की ‘नींव’ है। नींव दिखती नहीं है, किंतु भवन उसी पर खड़ा होता है। भवन की मजबूती उसी पर निर्भर करती है।‘ वहीं उनकी पार्टी के नेताओं के विचार दलितों को लेकर कुछ और ही है। यह भी साफ है कि बीजेपी सरकारमें अब तक कोई दलित नेता मुख्यमंत्री के पद तक पहुंच पाया है। ओबीसी और दलितों के बीच अपना आधार बढ़ाने के उसके दावे भी निराधार है।

हाशिये पर पड़े समुदायों से नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल करके बीजेपी ने शुरुआत तो की है, लेकिन बहुत देर से। वहीं बीजेपी पर आरोप लगता रहा है कि पिछले दो दशकों में सबसे ज्यादा भेदभाव करने वाली सरकार बीजेपी की है, जिसके कारण दलित समाज बीजेपी से नाखुश है।

टिप्पणियाँ
Popular posts
परमपिता परमेश्वर उन्हें अपने चरणों में स्थान दें, उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें व समस्त परिजनों व समाज को इस दुख की घड़ी में उनका वियोग सहने की शक्ति प्रदान करें-व्यापारी सुरक्षा फोरम
चित्र
शिक्षा और चिकित्सा हर किसी को निशुल्क मिले कुल भूषण त्यागी
चित्र
पीपल, बरगद, पाकड़, गूलर और आम ये पांच तरह के पेड़ धार्मिक रूप से बेहद महत्व
चित्र
मतदान लोकतंत्र का सबसे बड़ा पर्व है एडवोकेट अरविंद गुप्ता
चित्र
एलआईसी विश्वास और पारिवारिक सुरक्षा ,उज्जवल भविष्य और सम्मान का प्रतीक है प्रशांत वशिष्ठ,
चित्र