सरकार के लिए जीएसटी के मोर्चे पर बड़ी खुशखबरी, मिले 1.30 लाख करोड़ रुपये

 


नई दिल्ली : दीवाली के पहले सरकार के लिए अर्थव्यवस्था को बूस्टर शॉट मिला है. दरअसल अक्टूबर महीने में जीएसटी कलेक्शन 1,30,127 लाख करोड़ रुपये रहा है. जबकि, इससे पहले सितंबर महीने में यह 1.17 लाख करोड़ रुपये पर रहा था. सरकार द्वारा जारी डेटा के मुताबिक, अक्टूबर 2021 में जीएसटी कलेक्शन जीएसटी के लागू होने के बाद से दूसरा सबसे ज्यादा आंकड़ा रहा है.

अक्टूबर में 1,30,127 करोड़ रुपये का कुल जीएसटी रेवेन्यू कलेक्शन रहा है. यह पिछले साल के समान महीने में जीएसटी रेवेन्यू के मुकाबले 24 फीसदी और 2019-20 के मुकाबले 36 फीसदी ज्यादा है. अक्टूबर में 1,30,127 करोड़ रुपये के कुल जीएसटी कलेक्शन में 23,861 करोड़ रुपये का सीजीएसटी, 30,421 करोड़ रुपये का एसजीएसटी शामिल है. इसके अलावा इसमें 67,361 करोड़ रुपये का आईजीएसटी है, जिसमें 32,998 करोड़ रुपये सामान के आयात पर जमा किए गए हैं. कुल जीएसटी में 8,484 करोड़ रुपये का सेस शामिल हैं, जिसमें 699 करोड़ रुपये सामान के आयात पर कलेक्ट किए गए हैं.

सरकार के डेटा में दिखा है कि उसने सीजीएसटी को 27,310 करोड़ रुपये का सेटलमेंट और एसजीएसटी को आईजीएसटी से 22,394 करोड़ रुपये रेगुलर सेटलमेंट के तौर पर किया है. अक्टूबर 2021 के महीने में रेगुलर सेटलमेंट के बाद केंद्र और राज्य का कुल रेवेन्यू सीजीएसटी के लिए 51171 करोड़ रुपये और एसजीएसटी के लिए 52,815 करोड़ रुपये रहा है.

 


सरकार ने बयान में कहा है कि महीने के दौरान सामान के आयात से रेवेन्यू पिछले साल के समान महीने के मुकाबले 39 फीसदी ज्यादा रहा है. घरेलू ट्रांजैक्शन से मिला रेवेन्यू पिछले साल के समान महीने के मुकाबले 19 फीसदी ज्यादा रहा है, जिसमें सेवाओं का आयात शामिल है.

सरकार ने कहा कि अक्टूबर में जीएसटी रेवेन्यू जीएसटी के पेश होने के बाद से दूसरा सबसे ज्यादा स्तर पर रहा है. इससे पहले अप्रैल 2021 में रिकॉर्ड जीएसटी कलेक्शन हुआ था, जो साल के आखिर के रेवेन्यू से संबंधित था. सरकार के मुताबिक, यह आर्थिक रिकवरी के ट्रेंड के मुताबिक है. उसने कहा कि यह दूसरी लहर के बाद से हर महीने जनरेट होने वाले ई-वे बिलों के ट्रेंड से भी दिखता है. रेवेन्यू और ज्यादा होता, अगर कार और दूसरे प्रोडक्ट्स की सेल, सेमी-कंडक्टर की सप्लाई में रूकावट की वजह से प्रभावित नहीं होती.

जीएसटी कलेक्शन बढऩे से सरकार का राजकोषीय घाटा कम होता है. राजकोषीय घाटा घटने से सरकार पर कर्ज और ब्याज अदायगी का बोझ कम हो जाता है. सरकारें राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए सब्सिडी और बाकी खर्च में कटौती भी करती हैं. वित्त मंत्रालय हर साल बजट में राजकोषीय घाटे का लक्ष्य तय करता है. अब जीएसटी कलेक्शन बढऩे से सरकार के लिए इसके टार्गेट को हासिल करना भी आसान हो जाएगा. इससे ज्यादा संख्या में विदेशी निवेशक भी भारत के शेयर बाजार में पैसा लगाएंगे. और इससे बाजार में तेजी आएगी, जिससे घरेलू निवेशकों को भी फायदा मिलेगा.

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