दिलचस्प रहने वाला है यूपी में चौथे चरण का मतदान, दागी प्रत्याशियों समेत करोड़पति सब हैं मैदान में

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में तीसरे फेज का चुनाव खत्म होने के बाद अब चौथा चरण पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि प्रदेश के विधानसभा चुनाव परिणाम का असर अगले लोकसभा चुनाव पर भी पड़ेगा. चौथे चरण में 9 जिलों की 59 सीटों पर 23 फरवरी को मतदान होना है.
बताते चलें कि राज्य में बीजेपी जहां अपनी सत्ता बरकरार रखना चाहती है, वहीं अखिलेश यादव भाजपा को टक्कर दे रहे हैं. उधर कांग्रेस, बीएसपी और दूसरे दलों ने भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी है.

कुल 624 उम्मीदवार मैदान में

इस चरण में कुल 624 उम्मीदवार मैदान में हैं. सभी राजनीतिक दल और जनता चौथे चरण की वोटिंग के लिए तैयारियां कर रही हैं. इसमें लखनऊ सहित 9 जिलों में 23 फरवरी को वोटिंग होगी. पिछले चुनाव में बीजेपी ने इस इलाके से बड़ी बाजी मारी थी. चौथे चरण के मतदान में उम्मीदवारों के साथ-साथ केंद्र सरकार के कई मंत्रियों की भी परीक्षा होगी.

चौथे चरण में यहां होगा मतदान

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अजय कुमार शुक्ला ने बताया कि चौथे चरण में पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, लखनऊ, उन्नाव, रायबरेली, फतेहपुर और बांदा मतदान होगा. वहीं इन जिलों में 59 सीटें हैं और इसमें पीलीभीत, बरखेड़ा, बीसलपुर, पलिया, गोला गोकरनाथ, धौरहरा, लखीमपुर, मोहम्मदी, सीतापुर, लहरपुर, बिसवां, सेवटा, महमूदाबाद, मिश्रीख एस, शाहाबाद, हरदोई, बिलग्राम-मल्लनवा, संडीला, उन्नाव, भगवंतनगर, पुरवा, मलिहाबाद एस,बख्शी का तालाब, सरोजनी नगर, लखनऊ वेस्ट, लखनऊ नॉर्थ, लखनऊ ईस्ट, लखनऊ सेंट्रल, लखनऊ छावनी, मोहनलालगंज प्रमुख सीट हैं.

सबसे अधिक आपराधिक छवि वाले उम्मीदवार

इसी चरण में सबसे अधिक आपराधिक छवि वाले उम्मीदवार मैदान में हैं. इस चरण के 27 फीसदी उम्मीदवारों पर आपराधिक मुकदमे हैं. वहीं, 21 फीसदी पर गंभीर अपराधों के आरोप हैं. मसलन सपा और भाजपा के दो-दो उम्मीदवार ऐसे हैं, जिन पर हत्या का मुकदमा दर्ज है. हालांकि बसपा ने भी एक हत्यारोपित को टिकट दिया है. इस चरण में 59 सीटों पर चुनाव होना है जिसके लिए 624 उम्मीदवारों ने दावेदारी की है. एडीआर ने इसमें 621 का शपथपत्र परखा है. इसमें 167 उम्मीदवारों ने अपने ऊपर आपराधिक मुकदमे घोषित किए हैं.

कांग्रेस के 38 फीसदी, सपा के 39 फीसदी, बसपा के 37 फीसदी और भाजपा के 30 फीसदी उम्मीदवारों पर गंभीर आपराधिक मुकदमे हैं. वहीं, आप के 20 फीसदी उम्मीदवारों ने अपने ऊपर गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए हैं. ये वे अपराध हैं, जिनमें कम से कम 5 साल की सजा है. 9 उम्मीदवारों ने अपने ऊपर महिला अत्याचार से जुड़े आरोपों की जानकारी दी है. इसमें दो बलात्कार के आरोपित हैं. 59 में 29 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां चुनाव लड़ रहे 3 या इससे अधिक प्रत्याशियों पर मुकदमे हैं.

सबसे अधिक मुकदमे

  • रविदास मेहरोत्रा (सपा)- लखनऊ मध्य : 22 मुकदमे
  • सुरेंद्र कुमार (कांग्रेस)- बालामऊ : 09 मुकदमे
  • जलीश खां (बसपा)- सरोजनीनगर : 05 मुकदमे
करोड़पतियों पर मेहरबानी

भारतीय जनता पार्टी जहां एक ओर गरीब कल्याण की राजनीति का दावा कर रही है वहीं दूसरी ओर पार्टी के 88 फीसदी उम्मीदवार करोड़पति हैं. भाजपा के उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 7.87 करोड़ रुपये है. चुनाव लड़ रहे सभी उम्मीदवारों की बात करें तो संपत्ति का औसत 2.46 करोड़ रुपये हैं. 42 फीसदी उम्मीदवारों ने अपने ऊपर देनदारी भी घोषित की है.

इस चरण के 60 फीसदी उम्मीदवार ग्रैजुएट हैं. 32 फीसदी उम्मीदवार 5वीं से 12वीं तक पढ़े हैं. 30 उम्मीदवारों ने खुद को साक्षर और 9 ने निरक्षर घोषित किया है. 36 फीसदी उम्मीदवार 40 साल से कम उम्र के हैं, तो 54 फीसदी ने अपनी उम्र 41 से 60 साल के बीच बताई है. चौथे चरण में 15 फीसदी महिलाओं को भी टिकट दिया गया है.

सबसे अमीर उम्मीदवार

  • राजीव बख्शी (आप)- लखनऊ पश्चिम : 56 करोड़
  • अनूप कुमार गुप्ता (सपा)- महोली : 52 करोड़
  • शोभित पाठक (बसपा)- हरदोई : 34 करोड़
इनके लिए अग्निपरीक्षा से कम नहीं है चुनाव

चौथे चरण में जिन जिलो में वोट डाले जा रहे हैं, वहां कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर है. इसमें लखनऊ कैंट से चुनाव लड़ रहे प्रदेश केकानून मंत्री बृजेश पाठक, नगर विकास मंत्री आशुतोष टंडन के अलावा प्रवर्तन निदेशालय से सर्विस छोड़कर आए राजेश्वर सिंह भाजपा उम्मीदवार के रूप में किस्मत आजमा रहे हैं. वहीं समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री रहे अभिषेक मिश्रा व रविदास मल्होत्रा की प्रतिष्ठा भी दांव पर होगी. विधानसभा उपाध्यक्ष नितिन अग्रवाल भी इसी चरण में हरदोई से किसमत आजमा रहे हैं.

रायबरेली में कांग्रेस छोड़ भाजपा में आईं अदिति सिंह भी इसी चरण में मैदान में हैं. इसी चरण में लखीमपुर खीरी में भी चुनाव होना है. किसानों के विरोध और लखीमपुर के तिकुनिया में हुई घटना के कारण इस जिले पर सभी की निगाहें हैं. इसलिए ये इनके लिए अग्निपरीक्षा से कम नहीं हैं.

कितने पढ़े लिखे हैं नेता
  • 201 यानी 32 फीसदी उम्मीदवार 5वीं से 12वीं के बीच पढ़े लिखे
  • 375 यानी 60 फीसदी उम्मीदवार स्नातक या इससे अधिक पढ़े लिखे
  • 09 उम्मीदवार असाक्षर
  • 30 उम्मीदवार सिर्फ साक्षर
  • 91 यानी 15 फीसदी महिला उम्मीदवार मैदान में हैं.
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