पुस्तकें हमारी अनमोल संस्कृति और विरासत हैं - पुनीत गुप्ता

 

पुनीत गुप्ता

गाजियाबाद राज नगर आरडीसी बुक बैंक गाजियाबाद के संस्थापक पुनीत गुप्ता एलआईसी गुरु ने एक संक्षिप्त वार्ता के अंतर्गत  कहा कि कई दशकों पूर्व से वर्तमान काल तक यह प्रमाणित होता चला आ रहा है की पुस्तकें भूत वर्तमान और भविष्य की अनमोल संस्कृति और विरासत है हम सभी नागरिकों का यह परम कर्तव्य बनता है   कि यहां अपने आने वाले युवा पीढ़ी को सदैव इस संस्कृति और विरासत को एक अनमोल रत्न के रूप में दे पुस्तकें एक ऐसा खजाना है जिससे हर मानव अपनी जिंदगी को सवार सकता है अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है पुनीत गुप्ता ने कहा कि मैं यह सब बातें इसके लिए बता रहा हूं कि आज के इस संचार युग में हर वर्ग का नागरिक ज्ञान को आत्मसात करना नहीं चाहता वह गूगल और मनोरंजन भरी चैनलों को मोबाइल के द्वारा टकटकी लगाकर देखता रहता है लेकिन उसे यह बाद में आभास होता है कि उसने कितने घंटे समय बर्बाद कर दिया और यदि कोई विद्यार्थी व्यापारी या  सर्विस सेक्टर में काम करने वाले लोग यदि संबंधित पुस्तकों का दिल से अध्ययन करते हैं और उसे आत्मसात करते हैं तो यह 100 फ़ीसदी सच होता है कि उनका ज्ञान में क्रांतिकारी परिवर्तन होता है जिससे वे अपने को और अपने समाज को संवार सकते हैं इसी कड़ी में यह बहुत आवश्यक है कि हर विद्यार्थी पुस्तकों को एक कागज की किताब ना माने बल्कि गंभीरता पूर्वक यह सोचे कि यह किताब ज्ञान का और अपने जीवन को सुधारने का एक अनमोल मंत्र और यंत्र दोनों ही हैं आपने कहा कि चाहे इंजीनियर की पढ़ाई हो या डॉक्टर की पढ़ाई हो या शास्त्र की पढ़ाई हो सब जगह सर्वप्रथम अगर कोई अस्त्र शस्त्र के रूप में सामने आता है तो वह होता है पुस्तक यानी किताब हम सभी नागरिकों को पुस्तकों की महत्व को समझना चाहिए इसलिए बुक बैंक गाजियाबाद का स्थापना की गई पुनीत गुप्ता ने कहा कि बुक बैंक गाजियाबाद अपने दूरदर्शी उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु यह संगठन को बनाकर काफी गौरवान्वित महसूस कर रहा है जिसके पीछे उद्देश्य यह है कि विद्यार्थी या अन्य प्रोफेशनल कोर्स करने वाले युवा पीढ़ी पढ़ाई करने के उपरांत अपने पुस्तकों को या तो धूल चढ़ाते हैं या उसको रद्दी में बेच देते हैं रद्दी में बेचने के बाद अनमोल पुस्तकों की पन्नों में चाट पकौड़ी खा कर उसे कूड़े के ढेर में फेंक देते हैं पुस्तकों की उपयोगिता चाट पुरी खाने के लिए नहीं है उसे कूड़े में फेंकने के लिए नहीं है पुस्तकों की उपयोगिता आने वाली पीढ़ी को स्वावलंबी और ज्ञान अर्जित करने के लिए बनाई गई है इन्हीं तर्कों को ध्यान में रखते हुए पुनीत गुप्ता ने बताया कि बुक बैंक गाजियाबाद अपने उद्देश्य को जन जन तक पहुंचाने के लिए और सदैव आगे बढ़ने के लिए  संकल्पित है और गाजियाबाद के समस्त विद्यार्थियों प्रोफेशनल कोर्स कर रहे युवाओं से अपील करता है कि वे अपनी पढ़ाई पूरा करने के उपरांत डिग्री प्राप्त करने के बाद उन पुस्तकों को रद्दी के ढेर में ना डालें बल्कि बुक बैंक गाजियाबाद में सम्मान पूर्वक जमा कराएं जिससे उस पुस्तक का लाभ आगामी पीढ़ी उठा सके और समाज का हर नागरिक शिक्षित ज्ञानी और संस्कारवान बनकर  अपने को अपने समाज को और देश को आगे बढ़ा सके

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