अदालत ने ‘राम सेतु’ को राष्ट्रीय विरासत स्थल घोषित करने संबंधी याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा

 


भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने यूपीए-1 के कार्यकाल की सेतुसमुद्रम नहर परियोजना के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में यह जनहित याचिका दायर कर कथित राम सेतु को राष्ट्रीय धरोहर स्थल घोषित करने की मांग की थी. अदालत ने साल 2007 में परियोजना के लिए काम पर रोक लगा दी थी.

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी की उस याचिका पर जवाब दाखिल करने के वास्ते केंद्र को चार सप्ताह का समय दिया है, जिसमें कथित राम सेतु को राष्ट्रीय विरासत स्थल घोषित करने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया गया है.

प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ को सुब्रह्मण्यम स्वामी ने बताया कि अतीत में कई निर्देशों के बावजूद सरकार द्वारा हलफनामा दाखिल करना बाकी है. उन्होंने कहा कि मामला लंबे समय से चल रहा है, लेकिन सरकार कोई पक्ष नहीं ले रही है. उन्हें केवल ‘हां’ या ‘ना’ कहना है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, स्वामी ने केंद्र की सेतुसमुद्रम नहर परियोजना के खिलाफ यह जनहित याचिका दायर की थी. उस समय केंद्र में यूपीए-1 सत्ता में थी. इस परियोजना में 83 किलोमीटर लंबे गहरे जल मार्ग के निर्माण की परिकल्पना की गई थी, जो मन्नार को पाक जलडमरूमध्य से जोड़ता था, जो कि कथित राम सेतु का हिस्सा बनने वाले चूना पत्थर की शृंखला को हटाकर किया जाना था.

यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा, जहां 2007 में कथित राम सेतु पर परियोजना के लिए काम पर रोक लगा दी गई. स्वामी ने इसे राष्ट्रीय विरासत स्थल घोषित करने का निर्देश देने की मांग की थी.

केंद्र के वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगते हुए कहा, ‘जवाबी हलफनामा तैयार है. हमें मंत्रालय से निर्देश लेने होंगे.’

पीठ ने कहा, ‘आप अपने (केंद्र) पैर पीछे क्यों खींच रहे हैं.’

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दायर किए जाने पर इसकी एक प्रति याचिकाकर्ता (स्वामी) को दी जाए. इसके बाद यदि उस पर कोई जवाब देना हो तो उसके लिए दो सप्ताह का समय दिया जाता है.’

इससे पूर्व तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने तीन अगस्त को कहा था कि स्वामी की याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा.

कथित राम सेतु को एडम्स ब्रिज के तौर पर भी जाना जाता है. यह तमिलनाडु के दक्षिणपूर्वी तट पर पंबन द्वीप और श्रीलंका के उत्तर-पश्चिमी तट पर मन्नार द्वीप के बीच चूना पत्थर की एक शृंखला है.

भाजपा नेता स्वामी ने कहा था कि वह मुकदमे का पहला चरण जीत चुके हैं, जिसमें केंद्र सरकार ने कथित राम सेतु के अस्तित्व को माना है. उन्होंने कहा कि संबंधित केंद्रीय मंत्री ने वर्ष 2017 में उनकी मांग पर विचार करने के लिए एक बैठक बुलाई थी, लेकिन इसके बाद कुछ भी नहीं हुआ.

बाद में केंद्र सरकार ने कहा था कि उसने परियोजना के ‘सामाजिक-आर्थिक नुकसान’ पर विचार किया था और कथित  राम सेतु को नुकसान पहुंचाए बिना परियोजना के लिए एक और मार्ग तलाश करने की कोशिश की थी.

इसके बाद अदालत ने सरकार से नया हलफनामा दाखिल करने को कहा था.

रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2018 में केंद्रीय जहाजरानी मंत्रालय ने एक हलफनामे में अदालत को बताया था कि सरकार प्रस्तावित परियोजना के सामाजिक-आर्थिक नुकसान पर विचार करते हुए इसे लागू नहीं करना चाहती.

हलफनामे में कहा गया है कि भारत सरकार राष्ट्र के हित में एडम्स ब्रिज/राम सेतु को प्रभावित या नुकसान पहुंचाए बिना सेतुसमुद्रम शिप चैनल परियोजना के पहले के के विकल्प का पता लगाने का इरादा रखती है.

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