अडानी समूह शेयरों में गड़बड़ी और लेखा धोखाधड़ी में शामिल रहा है: अमेरिकी वित्तीय शोध कंपनी

 


वित्तीय शोध कंपनी हिंडनबर्ग का कहना है कि उसके दो साल के शोध के बाद पता चला है कि 17,800 अरब रुपये मूल्य वाले अडानी समूह के नियंत्रण वाली मुखौटा कंपनियां कैरेबियाई और मॉरीशस से लेकर यूएई तक में हैं, जिनका इस्तेमाल भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और कर चोरी को अंजाम देने के लिए किया गया. समूह ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है.नई दिल्ली: वित्तीय शोध कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च (Hindenburg Research) ने आरोप लगाया है कि अडानी समूह ‘खुल्लम-खुल्ला शेयरों में गड़बड़ी और लेखा धोखाधड़ी’ में शामिल रहा है.

 
हालांकि, समूह ने इस आरोप को पूरी तरह से बेबुनियाद बताया. उसने कहा कि यह कुछ और नहीं, बल्कि उसकी शेयर बिक्री को नुकसान पहुंचाने के गलत इरादे से किया गया है.समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, हिंडनबर्ग ने कहा कि अरबपति गौतम अडानी द्वारा नियंत्रित समूह की प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियों के पास ‘पर्याप्त ऋण’ था, जिसने पूरे समूह को ‘अनिश्चित वित्तीय स्थिति’ में डाल दिया है.

इसने यह भी कहा कि सात अडानी सूचीबद्ध कंपनियों में मौलिक आधार पर 85 प्रतिशत की गिरावट है, जिससे इसे स्काई-हाई वैल्यूएशन कहा जाता है.

अडानी समूह के एक प्रवक्ता ने रिपोर्ट पर टिप्पणी के लिए रॉयटर्स के अनुरोध का तुरंत जवाब नहीं दिया, जिसके बारे में हिंडनबर्ग ने कहा कि यह शोध पर आधारित था, जिसमें अडानी समूह के पूर्व अधिकारियों सहित दर्जनों व्यक्तियों के साथ-साथ दस्तावेजों की समीक्षा भी शामिल थी.


 हिंडनबर्ग ने कहा कि उसने यूएस-ट्रेडेड बॉन्ड और गैर-भारतीय-ट्रेडेड डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट्स के माध्यम से अपनी शॉर्ट पोजिशन रखी.

अमेरिकी कंपनी की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘अडानी समूह के संस्थापक और चेयरमैन गौतम अडाणी का नेटवर्थ 120 अरब डॉलर है. इसमें से 100 अरब डॉलर से ज्यादा का इजाफा पिछले तीन साल में हुआ. इसका कारण समूह की सूचीबद्ध सात कंपनियों के शेयरों में तेजी है. इनमें इस दौरान औसतन 819 प्रतिशत की तेजी हुई है.’

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