अडानी एंटरप्राइजेज समेत तीन समूह कंपनियां शेयर बाज़ारों की निगरानी में शामिल

शेयरों में जारी भारी गिरावट के बीच अडानी एंटरप्राइजेज के अलावा अडानी पोर्ट्स एंड एसईज़ेड और अंबुजा सीमेंट्स शेयर बाज़ारों- बीएसई और एनएसई के अल्पकालिक अतिरिक्त निगरानी व्यवस्था के दायरे में आ गई हैं. अडानी समूह की कंपनियों के शेयरों में शुक्रवार को लगातार सातवें दिन गिरावट हुई. अडानी एंटरप्राइजेज का शेयर 20 प्रतिशत टूट गया.

नई दिल्ली: शेयरों में जारी भारी गिरावट के बीच अडानी एंटरप्राइजेज समेत अडानी समूह की तीन कंपनियां शेयर बाजारों बीएसई और एनएसई के अल्पकालिक अतिरिक्त निगरानी व्यवस्था (एएसएम) के दायरे में आ गई हैं.

देश के दोनों प्रमुख शेयर बाजारों से बृहस्पतिवार को मिली नवीनतम सूचना के मुताबिक, अडानी एंटरप्राइजेज के अलावा अडानी पोर्ट्स एंड एसईजेड और अंबुजा सीमेंट्स भी अतिरिक्त निगरानी व्यवस्था के दायरे में आ गई हैं.

बाजार के जानकारों के मुताबिक, किसी शेयर के अतिरिक्त निगरानी व्यवस्था के तहत आने का मतलब है कि किसी कारोबारी दिन में ही संपन्न किए जाने वाले शेयर खरीद-बिक्री के लिए 100 प्रतिशत अग्रिम मार्जिन की जरूरत होगी.

इस व्यवस्था के तहत शेयरों का चयन ऊंचे एवं नीचे के भाव में बड़ा अंतर होने, खरीददारों का संकेंद्रण, कीमत दायरा छूने की संख्या, बाजार बंद होने वाले दिन पर पिछले बंद भाव की तुलना में अधिक अंतर होने और कीमत-आय अनुपात (पीई) जैसे मानकों का पालन किया जाता है.

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) और बीएसई ने कहा कि अडानी समूह की इन तीनों कंपनियों ने अल्पावधि के लिए अधिक निगरानी उपाय का हिस्सा बनने की शर्तों को संतोषजनक ढंग से पूरा किया है.

इसके साथ ही शेयर बाजारों ने कहा कि अल्पकालिक अतिरिक्त निगरानी व्यवस्था के तहत कंपनी का चयन विशुद्ध रूप से बाजार निगरानी के आधार पर किया जाता है और इसे उस कंपनी के खिलाफ प्रतिकूल कदम के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.

अमेरिकी निवेश शोध फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च की एक रिपोर्ट में गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद अडानी समूह की सभी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई है. समूह की शीर्ष कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज के शेयर का मूल्य करीब 60 प्रतिशत तक गिर चुका है.

अडानी समूह के शेयरों में गिरावट जारी, अडानी एंटरप्राइजेज का शेयर 20 फीसदी टूटा

अडानी समूह की कंपनियों के शेयरों में शुक्रवार को लगातार सातवें दिन गिरावट हुई. इस दौरान अडानी एंटरप्राइजेज का शेयर 20 प्रतिशत टूट गया.

अडानी एंटरप्राइजेज का शेयर 20 प्रतिशत टूटकर 1,173.55 रुपये प्रति शेयर पर पहुंच गया, जो बीएसई पर इसका एक साल का निचला स्तर है.

अडानी पोर्ट्स के शेयर में 10 फीसदी की गिरावट आई, अडानी ट्रांसमिशन में 10 फीसदी, अडानी ग्रीन एनर्जी में 10 फीसदी, अडानी पॉवर में पांच फीसदी, अडानी टोटल गैस में पांच फीसदी, अडानी विल्मर में 4.99 फीसदी, एनडीटीवी में 4.98 फीसदी, एसीसी में 4.24 फीसदी और अंबुजा सीमेंट्स के शेयर में तीन फीसदी की गिरावट आई.

अमेरिकी वित्तीय शोध कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च ने उद्योगपति गौतम अडानी की अगुवाई वाले समूह पर ‘खुले तौर पर शेयरों में गड़बड़ी और लेखा धोखाधड़ी’ में शामिल होने का आरोप लगाया गया है. कंपनी के इस आरोप के बाद समूह की कंपनियों के शेयरों में लगातार गिराावट आ रही है.

इससे पहले अडानी समूह की कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज का शेयर बृहस्पतिवार को लगभग 26 प्रतिशत टूट गया था.

समूह की ज्यादातर अन्य कंपनियों का प्रदर्शन भी लगातार छठे दिन कमजोर रहा. अडानी पोर्ट्स के शेयर में 6.13 फीसदी की गिरावट आई, अडानी ट्रांसमिशन में 10 फीसदी, अडानी ग्रीन एनर्जी में 10 फीसदी, अडानी टोटल गैस में 10 फीसदी, अडानी विल्मर में पांच फीसदी, एनडीटीवी में 4.99 फीसदी और अडानी पावर में 4.98 फीसदी की गिरावट आई थी.

हालांकि अंबुजा सीमेंट्स के शेयर 5.33 फीसदी और एसीसी के 0.05 फीसदी चढ़े.

बृहस्पतिवार को बीएसई में कंपनी का शेयर 26.50 प्रतिशत टूटकर 1,564.70 रुपये पर आ गया. दिन के कारोबार में यह 28.88 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,513.90 रुपये तक गिरा, जो 52 सप्ताह का निचला स्तर है.

बीते बुधवार (1 फरवरी) को कंपनी ने अपने 20 हजार करोड़ रुपये के फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (एफपीओ) को वापस लेने और निवेशकों का पैसा लौटाने की घोषणा की थी. हालांकि, कंपनी के एफपीओ को मंगलवार (31 जनवरी) को पूर्ण अभिदान मिल गया था.

एफपीओ एक प्रक्रिया है, जिसके द्वारा एक कंपनी, जो पहले से ही एक एक्सचेंज में सूचीबद्ध है, निवेशकों या मौजूदा शेयरधारकों, आमतौर पर प्रमोटरों को नए शेयर जारी करती है. एफपीओ का उपयोग कंपनियां अपने इक्विटी आधार में विविधता लाने के लिए करती हैं.

एक कंपनी आईपीओ की प्रक्रिया से गुजरने के बाद एफपीओ लाती है, और इसके जरिये कंपनी जनता के लिए अपने अधिक शेयर उपलब्ध कराने या किसी ऋण का भुगतान करने या अपने लिए पूंजी जुटाने के लिए करती है.

अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड के अध्यक्ष गौतम अडानी ने बुधवार को एक बयान में कहा था, ‘असाधारण परिस्थितियों के मद्देनजर कंपनी के निदेशक मंडल ने फैसला किया है कि एफपीओ पर आगे बढ़ना नैतिक रूप से ठीक नहीं होगा. निवेशकों का हित हमारे लिए सर्वोपरि है और उन्हें किसी तरह के संभावित नुकसान से बचाने के लिए निदेशक मंडल ने एफपीओ को वापस लेने का फैसला किया है.’

मालूम हो कि अमेरिकी निवेश अनुसंधान फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च ने अडानी समूह पर धोखाधड़ी के आरोप लगाए थे, जिसके बाद समूह की कंपनियों के शेयरों में पिछले कुछ दिन में भारी गिरावट आई है. इस रिपोर्ट में कहा गया था कि दो साल की जांच में पता चला है कि अडानी समूह दशकों से  ‘स्टॉक हेरफेर और लेखा धोखाधड़ी’ में शामिल रहा है.

रिपोर्ट सामने आने के बाद अडानी समूह ने बीते 26 जनवरी को कहा था कि वह अपनी प्रमुख कंपनी के शेयर बिक्री को नुकसान पहुंचाने के प्रयास के तहत ‘बिना सोचे-विचारे’ काम करने के लिए हिंडनबर्ग रिसर्च के खिलाफ ‘दंडात्मक कार्रवाई’ को लेकर कानूनी विकल्पों पर गौर कर रहा है.

इसके जवाब में हिंडनबर्ग रिसर्च ने कहा था कि वह अपनी रिपोर्ट पर पूरी तरह कायम है. कंपनी ने यह भी कहा था कि अगर अडानी समूह गंभीर है, तो उसे अमेरिका में भी मुकदमा दायर करना चाहिए, जहां हम काम करते हैं. हमारे पास कानूनी प्रक्रिया के दौरान मांगे जाने वाले दस्तावेजों की एक लंबी सूची है.

बीते 30 जनवरी को अडानी समूह ने हिंडनबर्ग रिसर्च के आरोपों के जवाब में 413 पृष्ठ का ‘स्पष्टीकरण’ जारी किया है. अडानी समूह ने इन आरोपों के जवाब में कहा था कि यह हिंडनबर्ग द्वारा भारत पर सोच-समझकर किया गया हमला है. समूह ने कहा था कि ये आरोप और कुछ नहीं सिर्फ ‘झूठ’ हैं.

समूह ने कहा था, ‘यह केवल किसी विशिष्ट कंपनी पर एक अवांछित हमला नहीं है, बल्कि भारत, भारतीय संस्थाओं की स्वतंत्रता, अखंडता और गुणवत्ता, तथा भारत की विकास गाथा और महत्वाकांक्षाओं पर एक सुनियोजित हमला है.’

अडानी समूह के इस जवाब पर पलटवार करते हुए हिंडनबर्ग समूह की ओर से बीते 31 जनवरी को कहा गया था कि धोखाधड़ी को ‘राष्ट्रवाद’ या ‘कुछ बढ़ा-चढ़ाकर प्रतिक्रिया’ से ढका नहीं जा सकता. भारत एक जीवंत लोकतंत्र और उभरती महाशक्ति है. अडानी समूह ‘व्यवस्थित लूट’ से भारत के भविष्य को रोक रहा है.

हिंडनबर्ग की ओर से कहा गया था, ‘हम असहमत हैं. स्पष्ट होने के लिए हम मानते हैं कि भारत एक जीवंत लोकतंत्र है और एक रोमांचक भविष्य के साथ एक उभरती हुई महाशक्ति है. हम यह भी मानते हैं कि भारत का भविष्य अडानी समूह द्वारा रोका जा रहा है, जिसने देश को व्यवस्थित रूप से लूटते हुए खुद को राष्ट्रवाद के आवरण में लपेट लिया है.’

हिंडनबर्ग रिसर्च ने प्रतिक्रिया में कहा कि धोखाधड़ी, धोखाधड़ी ही होती है चाहे इसे दुनिया के सबसे अमीर आदमी ने अंजाम क्यों न दिया हो.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, हिंडनबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि अरबपति गौतम अडानी द्वारा नियंत्रित समूह की प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियों के पास ‘पर्याप्त ऋण’ था, जिसने पूरे समूह को ‘अनिश्चित वित्तीय स्थिति’ में डाल दिया है.

साथ ही दावा किया गया था कि उसके दो साल के शोध के बाद पता चला है कि 17,800 अरब रुपये मूल्य वाले अडानी समूह के नियंत्रण वाली मुखौटा कंपनियां कैरेबियाई और मॉरीशस से लेकर यूएई तक में हैं, जिनका इस्तेमाल भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और कर चोरी को अंजाम देने के लिए किया गया.

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