अयोध्या केस: बाबर जैसे आक्रांता को देश के इतिहास से छेड़छाड़ का हक़ नहीं- हिंदू पक्ष

नई दिल्ली: अयोध्या मामले (Ayodhya) में आज (मंगलवार) सुनवाई का 39 वां दिन था. आज हिंदू पक्ष की ओर से के. परासरन और सीएस वैद्यनाथन ने दलीलें रखी. 92 साल के सीनियर एडवोकेट के परासरन ने भावनात्मक दलीलें रखते हुए कहा कि बाबर जैसे विदेशी आक्रमणकारी को हिंदुस्तान के गौरवशाली इतिहास को ख़त्म करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती. अयोध्या में राम मंदिर को विध्वंस कर मस्जिद का निर्माण एक ऐतिहासिक ग़लती थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट को अब ठीक करना चाहिए.



के परासरन ने कहा कि एक विदेशी आक्रमणकारी को ये हक़ नहीं दिया जा सकता है कि वो इस देश में आकर ख़ुद को बादशाह घोषित करे और कहे कि मेरी आज्ञा ही क़ानून है. अतीत में तो अनेक शक्तिशाली हिंदू राजा भी रहे है, पर किसी के विदेश में यूं आक्रमण करने का तो कोई उदाहरण नहीं मिलता.


श्रीराम के जन्मस्थान को बदल नहीं सकते


के परासरन ने दलील देते हुए कहा कि हिंदू श्रीराम के जन्मस्थान पर अपनी आस्था को लेकर सैकड़ो साल से संघर्ष कर रहे है. अकेले अयोध्या में ही 50-60 मस्जिद है, मुसलमान किसी और मस्जिद में भी इबादत कर सकते है, पर हिन्दुओं के लिए तो ये जगह उनके आराध्य श्रीराम का जन्मस्थान है, हम ये जगह नहीं बदल सकते.


इस पर मुस्लिम पक्ष के वकील धवन ने टोकते हुए कहा कि क्या परासरन ये भी बताएंगे कि अयोध्या में कितने मंदिर है.


परासरन ने धवन की टिप्पणी पर एतराज जताया. उन्होंने कहा कि हिंदुओ के लिए जन्मस्थान के महत्व को साबित करने के लिए ये दलील दी है. फिर ऐसी कोई तुलना करने से पहले वहां हिंदू/ मुस्लिम जनसंख्या के अनुपात को भी देखिए.


मंदिर हमेशा मंदिर ही रहेगा


चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने के परासरन से पूछा कि क्या आप धवन की इस दलील से सहमत है कि एक मस्जिद हमेशा मस्जिद ही रहेगी.


परासरन ने जवाब दिया कि मेरा कहना सिर्फ इतना भर है कि एक मंदिर हमेशा मंदिर ही रहेगा. मैं उनकी दलील पर कोई टिप्पणी नहीं करुंगा क्योंकि मैं इस्लामिक मान्यताओं का जानकार नहीं हूं. सोमवार को धवन ने कहा था कि एक मस्जिद हमेशा मस्जिद ही रहेगी. उसको धवस्त किये जाने से मस्जिद खत्म नहीं हो जाती. इमारत ढहाए जाने के बाद भी वो जगह मस्जिद ही है.


कोर्ट का धवन से सवाल


आज के परासरन की दलीलों के बीच चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस बोबड़े और जस्टिस चन्दचूड़ ने कई सवाल पूछे. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने धवन से पूछा, 'मिस्टर धवन, क्या हम हिंदू पक्ष से पर्याप्त सवाल पूछ रहे है. कल आपका कहना था कि सवाल हिंदू पक्ष से नहीं किये गए.


धवन ने जवाब दिया कि उनके कहने का ये मतलब नहीं था.


दरअसल कल मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा था कि मैंने नोटिस किया है कि सुनवाई के दौरान बेंच के सारे सवाल मुस्लिम पक्ष से ही रहे है. हिंदू पक्ष से कठिन सवाल नहीं पूछे गए.


वकीलों के बीच नोंक झोंक


सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष के वकील के परासरन, सीएस वैद्यनाथन और मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन के बीच तीखी नोंक झोंक देखने को मिली. धवन की टोका टोकी से परेशान वैद्यनाथन ने उन्हें अपनी रनिंग कमेंट्री बंद करने को कहा तो धवन ने सख्त शब्दों में इस पर एतराज जाहिर किया. इस पर चीफ जस्टिस ने दख़ल दिया. उन्होंने वकील वैद्यनाथन को सलाह दी कि वो नाराज़ होने के बजाए अपनी दलील पर ध्यान दे.


 सुनवाई में क्या होगा


 रामलला विराजमान की ओर से वकील सीएस वैद्यनाथन को 45 मिनट तक जिरह करने का मौका दिया जाएगा. उसके बाद करीब 1 घंटे मुस्लिम पक्ष के राजीव धवन को जवाब देने के लिए मिलेगा. इसके बाद कोर्ट moudling of relief को लेकर विचार करेगा. अगर कल ही moulding of relief ( पक्षकारों की ओर से वैकल्पिक मांग) पर बहस पूरी हो जाती है तो कल ही फैसला सुरक्षित रख लिया जाएगा.


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