मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के हर नागरिक की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध: उप मुख्यमंत्री डाॅ0 दिनेश शर्मा

 उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डाॅ0 दिनेश शर्मा ने कांग्रेस पार्टी के नेता श्री आनन्द शर्मा द्वारा आज एक प्रेस वार्ता में राज्य सरकार पर लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के हर नागरिक की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। अफवाह फैलाकर लोगों को गुमराह करने अथवा हिंसा में शामिल उपद्रवी तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसी के साथ प्रदेश सरकार यह भी सुनिश्चित कर रही है कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई न हो। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता अफवाह फैलाने अथवा हिंसा के जरिये उपद्रव करने वालों के इरादों को अच्छी तरह समझ चुकी है। यही कारण है कि आज लखनऊ सहित पूरे प्रदेश में अमन-चैन का माहौल है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोग ऐसे असामाजिक तत्वों के झांसे में अब नहीं आने वाले।



डाॅ0 शर्मा ने कहा कि जब उत्तर प्रदेश पुलिस पहले ही स्पष्ट कर चुकी थी कि धारा-144 लागू है, किसी भी तरह के आन्दोलन-प्रदर्शन की अनुमति नहीं है, तब भी सुनियोजित तरीके से पूरे प्रदेश को उपद्रव और दंगे की आग में झोंकने की कोशिश हुई। सार्वजनिक और निजी सम्पत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया। बच्चों एवं महिलाओं को ढाल बनाकर पुलिस पर पत्थर, लाठी-डण्डों और अवैध असलहों से हमला किया गया। पुलिस ने संयम बरतते हुए स्थिति पर काबू पाया। इस दौरान करीब 400 पुलिसकर्मी जख्मी हुए, जिससे 288 पुलिस कर्मियों को ज्यादा चोटें आयी हैं। खास बात यह है कि इनमें 61 पुलिस कर्मियों को उपद्रवियों की तरफ से चलायी गई गोली लगी है। इस प्रदर्शन में 700 से ज्यादा खोखा कारतूस बरामद हुए हैं, जो कि अवैध असलहों के हैं। यह इस बात को साबित करता है कि यह सब एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा था और पुलिस ने नुकसान सहते हुए, घायल होते हुए भी बेहद संयम बरता।



उप मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे प्रदेश में, बिजनौर को छोड़कर, कहीं भी पुलिस ने फायरिंग नहीं की। बिजनौर में भी उस वक्त फायरिंग की नौबत आयी, जब एस0पी0 श्री संजीव त्यागी उपद्रवियों से घिर गए थे। उपद्रवियों ने हत्या की नीयत से उन पर फायरिंग की। ऐन वक्त पर काॅन्सटेबल श्री मोहित शर्मा आगे आ गए और गोली उन्हें लगी। उपद्रवी अगली गोली से एस0पी0 को निशाना बनाते, इससे पूर्व श्री मोहित शर्मा ने घायल होने के बावजूद फायर किया, जिसमें एक उपद्रवी मारा गया। जहां तक कानपुर के वीडियो की बात है, तो वहां उपद्रवियों से चैतरफा घिरे एक पुलिसकर्मी ने डराने के उद्देश्य से अपनी रिवाॅल्वर निकालकर लहराई थी, परन्तु गोली आखिरी वक्त तक भी नहीं चलायी, जबकि उपद्रवियों की तरफ से लगातार फायरिंग की जा रही थी।
डाॅ0 शर्मा ने कहा कि जो लोग कानपुर के फेक वीडियो के सहारे, फर्ज निभा रही प्रदेश पुलिस पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें समाज हित में उन दर्जनों उपद्रवियों की वह तस्वीर भी जरूर सार्वजनिक करनी चाहिए, जिसमें ये उपद्रवी पुलिस कर्मियों पर अवैध असलहों से गोली चला रहे हैं। जो लोग कहते हैं कि शान्तिपूर्ण धरना था, उनको ये बताना चाहिए कि शान्ति की बात करने वालों ने डी0जी0पी0 की अपील और सरकार के स्पष्ट आदेश के बावजूद धारा-144 का उल्लंघन क्यों किया, कानून क्यों तोड़ा। पुलिस बार-बार अपील करती रही कि घरों में वापस लौट जाइए। इसके बावजूद उपद्रवियों द्वारा मीडिया की गाड़ियां जलायी गईं, रास्ते में खड़ी गाड़ियां तोड़ी गईं। भारी संख्या में सार्वजनिक सम्पत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि धारा-144 तोड़ना, पुलिस पर अवैध असलहों से फायरिंग करवाना और सार्वजनिक सम्पत्तियों को नुकसान पहुंचाना, पुलिस कर्मियों पर कातिलाना हमला करना और पूरे प्रदेश को उपद्रव और दंगे की आग में झोंकने की कोशिश करना, शान्तिपूर्ण नहीं कहा जा सकता है। अमरोहा के पत्रकार श्री तारिक अजीम को दंगाइयों ने जान से मारने की कोशिश की, उनकी गाड़ी तोड़ दी गई। उनका सामान लूट लिया गया।



इसी तरह लखनऊ में ए0एन0आई0 के वरिष्ठ पत्रकार श्री राघवेन्द्र पाण्डेय, ए0बी0पी0 के वरिष्ठ पत्रकार श्री रणवीर, श्री संजय त्रिपाठी, नेटवर्क-18 के पत्रकार श्री अजीत सिंह समेत तमाम पत्रकारों पर कातिलाना हमला किए गए। यही नहीं मीडिया की ओ0बी0 वैन में बैठे टीवी चैनल के ड्राइवरों और इंजीनियरों को उनकी गाड़ियों समेत जलाने का प्रयास किया गया है।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश पुलिस के पास ऐसे सैकड़ों वीडियो फुटेज, तस्वीरें और सी0सी0टी0वी0 फुटेज उपलब्ध है जिसमें उपद्रवी, महिलाओं और बच्चों को आगे कर, उपद्रव कर रहे हैं। खुद मीडिया के लोगों ने लाइव कवरेज के दौरान ये बताया कि कैसे पुलिस पर हमला करने से पूर्व, उपद्रवियों ने महिलाओं और बच्चों को पहले आगे किया, फिर पुलिस पर पत्थर, बोतलें, बम फेंके। यही नहीं महिलाओं और बच्चों की आड़ लेकर पुलिस पर फायरिंग की गई।



सवाल यह भी है कि जब धारा-144 लगी थी, स्पष्ट आदेश थे कि कोई भी आन्दोलन नहीं होने दिया जाएगा, तो ऐसे में वो कौन सी महिलाएं थी, जिन्होंने कानून को हाथ में लिया और धारा-144 तोड़कर पुलिस पर हमले करने के लिए उपद्रवियों की ढाल बनीं। प्रदेश पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी भी उपद्रवी को बख्शेंगे नहीं, लेकिन कोई निर्दोष जेल नहीं जाएगा और इसी कड़ी में उपलब्ध प्रमाणों, जिनमें वीडियो फुटेज, सी0सी0टी0वी0 फुटेज आदि शामिल है, इसी आधार पर कार्यवाही की जा रही है। वही लोग जेल भेजे जा रहे हैं, जो उपद्रवी थे।


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