पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव के निर्देश पर आगामी 21 सितम्बर 2020 को समाजवादी पार्टी सभी जनपदों में तहसील स्तर पर शारीरिक दूरी बनाए रखते हुए कोरोना संकट काल में स्वास्थ्य सेवाओं में अनियमितता, भ्रष्टाचार और सरकारी उत्पीड़न में वृद्धि, बेहाल किसान, बेरोजगारी और ध्वस्त कानून व्यवस्था के विरोध में जिला प्रशासन के माध्यम से महामहिम राज्यपाल महोदया को सम्बोधित ज्ञापन सौपेंगे।

पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव के निर्देश पर आगामी 21 सितम्बर 2020 को समाजवादी पार्टी सभी जनपदों में तहसील स्तर पर शारीरिक दूरी बनाए रखते हुए कोरोना संकट काल में स्वास्थ्य सेवाओं में अनियमितता, भ्रष्टाचार और सरकारी उत्पीड़न में वृद्धि, बेहाल किसान, बेरोजगारी और ध्वस्त कानून व्यवस्था के विरोध में जिला प्रशासन के माध्यम से महामहिम राज्यपाल महोदया को सम्बोधित ज्ञापन सौपेंगे।



     समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री नरेश उत्तम पटेल ने बताया कि भाजपा सरकार की जनहित विरोधी और दमनकारी नीतियों के खिलाफ समाजवादी अपनी आवाज उठाते रहे हैं। राज्य सरकार की गलत नीतियों और विरोध को कुचलने के रवैये से अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो रही है।



     समाजवादी पार्टी महामहिम राज्यपाल को ज्ञापन देकर सरकारी मनमानी, तानाशाही और ध्वस्त कानून व्यवस्था, शिक्षा-स्वास्थ्य क्षेत्र में गड़बड़ी आदि समस्याओं पर संवैधानिक दायित्व का निर्वहन करते हुए प्रभावी कार्यवाही करने का आग्रह करेगी।
     कोरोना का कहर विकराल रूप धारण करता जा रहा है। भाजपा की राज्य सरकार इसकी रोकथाम में असफल साबित हुई है। कोरोना संक्रमण के शिकार लोगों को पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं तथा उपचार नहीं मिल पा रहा है। अस्पतालों में कोरोना से मौतें थम नहीं रही हैं। समाजवादी सरकार के समय की 1090 और 181 महिला हेल्पलाइन जैसी सुविधाएं भी भाजपा सरकार खत्म करने जा रही है।



    अनियोजित लाॅकडाउन के दौरान जो लाखों श्रमिक प्रदेश में अपने घर वापस आए, रोजगार के अभाव, आर्थिक तंगी, नौकरी न होने और कारोबार व्यापार बंदी से मजबूर होकर आत्महत्या कर रहे हैं। किसान, मजदूर, नौजवान, बुनकर, व्यापारी, छात्र, महिलाएं, अल्पसंख्यक सभी बदहाल हैं। लूट, हत्या, अपहरण की घटनाएं रोज ही घट रही हैं। महिलाओं-बच्चियों से दुष्कर्म और विपक्ष खास कर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न के मामलों में सरकार संवेदनशून्य रवैया अपनाती है।
    उत्तर प्रदेश में अराजकता और जंगलराज का बोलबाला है। अपराधी बेखौफ हैं और जनता के जानमाल की सुरक्षा में पुलिसतंत्र विफल है। प्रदेश में फर्जी एनकाउण्टर और हिरासत में मौतों का सिलसिला चालू है। मंहगाई चरम पर है। स्कूल कालेज बंद हैं छात्रों का भविष्य अंधकार में है। सरकार आरक्षण भी खत्म करने की साजिश कर रही है।


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