हर व्यक्ति अपनी जरूरत के हिसाब से खेती अवश्य करें- एडवोकेट अरुण यादव


                     एडवोकेट अरुण यादव


 हिं.दै.आज का मतदाता  दिल्ली यमुना विहार एडवोकेट अरुण यादव वर्तमान करोना काल में पूरे विश्व के समक्ष पनपी चुनौती को ध्यान में रखते हुए कहा कि कोई महामारी हो या महाप्रलय हो या लॉकडाउन हो यदि खेती न होती तो संसार का पुनरुत्थान संदिग्ध रहता, प्राकृतिक दृष्टिकोण से भारतीय जलवायु  अन्य देशों के मुकाबले हर मौसम में  खेती को प्रोत्साहित करती है यह कथन एक संक्षिप्त वार्ता के अंतर्गत एडवोकेट अरुण यादव ने कहा l आपने कहा कि हमारा देश कृषि प्रधान देश है जिसके कारण आज करोना जैसी वैश्विक महामारी में भी भारतीय सुरक्षित है l आपने कहा कि औद्योगिक घरानों का चक्का जाम होने के बावजूद एक मजदूर देश के बड़े-बड़े उद्योगपतियों की पेट की रक्षा के लिए पूर्ण समर्पित भाव से अपने गांव में खेती करता रहा है l आपने कहा कि यदि देश का हर नागरिक अपने हिस्से का खेती करता है तो मुझे पूर्ण विश्वास है कि उसका जीवन हमेशा सुखमय एवं समृद्धि से परिपूर्ण रहेगा अपने देश में पनप रहे भ्रष्टाचार एवं कानूनी परिपेक्ष में शीर्ष संस्थान लोकसभा एवं विधानसभा में समस्त सांसद एवं विधायक चुने जाने हेतु न्यूनतम योग्यता एलएलबी हो इसकी सरकार से अपील किया हैl आपने कहा कि जब संसद और विधानसभा में योग्य, शिक्षित नेता बैठेंगे तो स्वतः ही देश की कानून व्यवस्था मजबूत होगी और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी l एडवोकेट अरुण यादव ने कहा कि वर्तमान समय में देश की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है सरकार को सबसे ज्यादा आर्थिक स्थिति को कैसे मजबूत बनाई जाए उस पर ज्यादा से ज्यादा कार्यवाही करनी चाहिए तथा सरकार रोजगार परक एवं तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा दें रोजगार के अवसर बढ़ाए तभी आर्थिक क्षेत्र में बुनियादी सफलता मिल पाएगी l अरुण यादव ने देश में वर्तमान बैंकिंग प्रणाली पर प्रश्न चिन्ह खड़ा करते हुए कहा कि बैंक सही व्यक्तियों व जरूरतमंद लोगों को लोन नहीं दे रहे हैं करोना  काल में घोषित 20 लाख करोड़ का पैकेज जमीनी धरातल पर नहीं पहुंचा है इसकी समीक्षा होनी चाहिए l आपने कहा कि देश में कुछ बड़े औद्योगिक घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए रेलवे, एयर इंडिया के साथ-साथ अनेक नवरत्न कंपनी को प्राइवेट हाथों में देना भविष्य के लिए खतरा है सरकार को अपनी इस नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई faceless scooting से संबंधित सवाल के जवाब में आपने कहा कि यह लोकतंत्र का हनन है और संवैधानिक रूप से एक आम व्यक्ति को मिले फंडामेंटल अधिकार को चुनौती है सरकार को इस कानून में ऐसी नीति को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ानी होगी जिससे आम व्यक्ति का मौलिक अधिकारों का हनन ना हो


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