कोविड-19 लॉकडाउन से ऑटोमोबाइल उद्योग को प्रतिदिन 2300 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ: संसदीय समिति

वाणिज्य विभाग से जुड़ी संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑटोमोबाइल उद्योग संगठनों के अनुसार, इस क्षेत्र में अनुमानित रूप से 3.45 लाख नौकरियों का नुकसान हुआ. कम मांग और वाहनों की बिक्री में कमी आने के कारण निर्माताओं ने अपना उत्पादन 18-20 फ़ीसदी कम कर दिया है.

प्रतीकात्मक तस्वीर. (फोटो: रॉयटर्स)

प्रतीकात्मक तस्वीर. (फोटो: रॉयटर्स)

हिंदी दैनिक आज का मतदाता नई दिल्ली: कोविड-19 महामारी और उसके कारण लागू लॉकडाउन के मद्देनजर ऑटोमोबाइल उद्योग को प्रतिदिन 2,300 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा और इस क्षेत्र में अनुमानित रूप से 3.45 लाख नौकरियों का नुकसान हुआ. संसद की एक समिति की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है.

वाणिज्य विभाग से जुड़ी संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने मंगलवार को पेश की. इस समिति के अध्यक्ष तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) सांसद केशव राव हैं.

समिति ने अपनी रिपोर्ट में देश में ऑटोमोबाइल क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए कई उपाए सुझाए हैं, जिसमें वर्तमान भूमि और श्रम कानूनों को सुव्यवस्थित करने की बात कही गई है.

रिपोर्ट के अनुसार, ‘समिति को ऑटो उद्योग संगठनों ने यह सूचित किया है कि सभी मूल उपकरण विनिर्माताओं (ओईएम) ने कम मांग और वाहनों की बिक्री में कमी आने के कारण अपना उत्पादन 18-20 फीसदी कम कर दिया है. इसके परिणामस्वरूप ऑटोमाबाइल क्षेत्र में रोजगार का परिदृश्य प्रभावित हुआ और इस क्षेत्र में अनुमानित रूप से 3.45 लाख नौकरियों का नुकसान हुआ.’

इसमें कहा गया है कि ऑटो क्षेत्र में मानव संसाधन की भर्तियां रुक गई हैं. इसके अलावा 286 ऑटो डीलरों ने अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए.

रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्पादन में कटौती का इस क्षेत्र में पुर्जों से जुड़े उद्योग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है.

इसमें कहा गया है, ‘कोविड-19 महामारी और उसके कारण लागू लॉकडाउन के मद्देनजर ऑटोमोबाइल उद्योग को प्रतिदिन करीब 2,300 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा.’

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, संसद की स्थायी समिति ने आगे कहा कि वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि लॉकडाउन की अवधि कब तक रहती है तथा कोविड-19 के प्रकोप की तीव्रता और प्रसार कैसी रहती है.

समिति ने कहा है कि संकट को देखते हुए यह आशंका है कि वाहन उद्योग में कम से कम दो साल बड़ी गिरावट रह सकती है. इससे क्षमता का कम उपयोग होगा, पूंजी व्यय कम होगा, कंपनियों के दिवालिया होने तथा पूरे वाहन क्षेत्र में नौकरियों पर प्रतिकूल असर रहने की आशंका है.

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