मेघालय और झारखंड में अवैध खदान दुर्घटनाओं में 10 लोगों की मौत

मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स ज़िले में एक अवैध कोयला खदान में एक यांत्रिक ढांचा ढहने से छह खनिकों की मौत हो गई. वहीं, झारखंड के कोडरमा ज़िले में अवैध रूप से संचालित अभ्रक खदान के धंस जाने से छह मजदूर दब गए थे, जिसमें से चार की मौत हो गई.

(प्रतीकात्कम फोटो: पीटीआई)

(प्रतीकात्कम फोटो: पीटीआई)

शिलॉन्ग: मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले में एक अवैध कोयला खदान में एक यांत्रिक ढांचा ढहने से छह खनिकों की मौत हो गई. एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी.

उपायुक्त ई. खरमाल्की ने बताया कि यह घटना बृहस्पतिवार को दिनेशलालु, सरकरी और रेयम्बई गांवों के एक त्रिकोणीय जंक्शन पर हुई.

उन्होंने कहा, ‘इस हादसे में छह लोगों की मौत हुई है. श्रमिक जब खदान में गड्ढा खोद रहे थे तो अचानक यांत्रिक ढांचा ढह गया जिसके बाद वे एक गड्ढे में गिर गए और उनकी मौत हो गई.’

अधिकारी ने बताया कि हादसे में मारे गए छह लोगों में से पांच की पहचान हो गई है. उन्होंने बताया कि ज्यादातर पड़ोसी प्रदेश असम के रहने वाले थे.

उपायुक्त ने बताया कि अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि श्रमिक कोयला खनन या फिर पत्थर खनन गतिविधियों में लगे थे. पुलिस ने नियोक्ता के खिलाफ मामला दर्ज किया है और जांच जारी है.

पुलिस की ओर से जारी बयान में कहा गया है, ‘खलिरिअट पुलिस थाने में आपराधिक मामला दर्ज कर लिया गया है. खदान के मालिक और मैनेजर का पता लगाने के लिए जांच जारी है, क्योंकि हादसा होने के बाद से वे फरार हैं.’

गौरतलब है कि दिसंबर 2018 में राज्य के पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले के कसन क्षेत्र में इसी तरह की एक खनन दुर्घटना में 15 लोगों की मौत हो गई थी.

इस दुर्घटना से पता चला कि मेघालय में एनजीटी द्वारा साल 2014 में प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भी रैट होल खदानों में खनन जारी है. रैट होल खदान चूहों के बिल जैसी होती है, जिसमें संकरी सुरंगें खोदी जाती हैं, जिसके भीतर मजदूर जाते हैं और कोयला निकाल कर लाते हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय में निजी और सामुदायिक स्वामित्व वाली जमीन में इस शर्त के साथ खनन की मंजूरी दे दी थी कि इसके लिए सभी आवश्यक अनुमतियां और मंजूरी प्राप्त की गई हों. पिछले साल अक्टूबर में जब अवैध खनन के आरोप उठने लगे तब राज्य के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने दावा किया था कि यह राजनीति से प्रेरित आरोप हैं.

झारखंड अभ्रक खदान धंसने से छह मज़दूरों की मौत 

कोडरमा: मेघालय के अलावा झारखंड के कोडरमा जिले में डुमरियाटांड़ फुलवरिया के समीप स्थित घने जंगलों के बीच अवैध रूप से संचालित अभ्रक खदान के बृहस्पतिवार रात धंस जाने से छह मजदूर दब गए. इनमें चार मजदूरों की मौत हो गई जबकि दो मजदूर घायल अवस्था में मलबे में से निकाल लिए गए.

शुक्रवार शाम को पुलिस की एक टीम ने धंसी खदान के मलबे से चार मजदूरों के शव बरामद किए.

कोडरमा के उपायुक्त रमेश घोलप ने बताया कि कल देर शाम हुई इस दुर्घटना में कुल छह लोग खदान धंसने से मलबे में फंस गए थे. इनमें से दो को ग्रामीणों ने रात्रि में ही घायल हालत में बाहर निकाल लिया था, जिससे उनकी जान बच गई लेकिन शेष चार मलबे में फंसे रह गए और आज (शुक्रवार) घने जंगल में स्थित खदान में पोकलेन मशीन से खुदाई कर एक महिला समेत चार मजदूरों के शव बाहर निकाले गए.

उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों ने पुष्टि की कि खदान में कुल छह लोग ही फंसे थे और अब इसमें और किसी के फंसे होने की संभावना नहीं है.

इस बीच कोडरमा के पुलिस अधीक्षक एहतेशाम वकारिब ने बताया, ‘पहले प्राप्त रिपोर्ट में अवैध खदान में कम से कम आठ लोगों के दबने की आशंका जताई गई थी, लेकिन बाद में स्थानीय लोगों ने पुष्टि की कि आधा दर्जन लोग ही इस दुर्घटना में मलबे में दबे थे. इन आधा दर्जन लोगों में से दो को कल (बृहस्पतिवार) शाम ही ग्रामीणों ने मलबे से बाहर निकाल लिया था जबकि चार के शव आज (शुक्रवार) मलबे से बाहर निकाले गए.’

उन्होंने बताया कि चार मजदूरों के शव निकाले जाने के बाद राहत एवं बचाव कार्य बंद कर दिया गया है, क्योंकि वहां और किसी के फंसे होने की अब आशंका नहीं है.

इस दुर्घटना में मृतकों की पहचान फुलवरिया निवासी 35 वर्षीया कौशल्या देवी, बरसोतियाबर निवासी 50 वर्षीय लखन दास, 60 वर्षीय चन्दर दास और पूरनानगर निवासी 50 वर्षीय महेंद्र दास के रूप में की गई है. वहीं, डुमरियाटांड़ निवासी 25 वर्षीय राजेश घटवार और 30 वर्षीय संजय घटवार घायल हो गए.

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि वन अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कोडरमा थाने में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है.

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