अवैध गिट्टी के खनन में रेल और खनिज विभाग बने मौसेरे भाई करोड़ों के रेवेन्यू का चूना पर उफ् तक नहीं
 
लखनऊ : अभी तक अवैध खनन के परिवहन के खेल ट्रकों से होता था। लेकिन सोनभद्र में अवैध खनन और परिवहन के लिए ट्रकों के साथ साथ ट्रेनों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। ताजा मामला सोनभद्र के बिल्ली मारकुंडी रेलवे स्टेशन का है जहाँ सोनभद्र के जिलाधिकारी द्वारा अवैध खनन और परिवहन पर बड़ी कार्यवाही से पूरे महकमे में हड़कम्प मच गया है।
सोनभद्र के बिल्ली मारकुंडी रेलवे स्टेशन पर 3000 घन मीटर यानी लगभग 300 ट्रक अवैध गिट्टी को जिलाधिकारी ने जांच करा कर सीज कर दिया है। इस कार्यवाही के बाद रेलवे विभाग के साथ साथ खनन विभाग पर बड़े सवाल खड़े हो रहे है। जबकि रेल विभाग इस बात से इनकार कर रहा है कि उसे नही पता कि इतनी बड़ी मात्रा में अवैध गिट्टी उसके एरिया में कैसे डंप हो गया । वही जिलाधिकारी के निर्देश पर खनन विभाग द्वारा कार्यवाही किये जाने के बाद खुद खनन विभाग भी इसकी जिम्मेदारी लेने से इनकार कर रहा है। मतलब ये कि इतनी बड़ी मात्रा में अवैध गिट्टी खदान से निकल कर रेलवे स्टेशन के एरिया में कैसे पहुंची ये न तो खनन विभाग को पता है और न ही रेलवे विभाग को ही।
अब जरा सोचिए जिस प्रदेश का मुखिया अवैध खनन पर इतना सख्त हो उसी प्रदेश के जिले में सालों से इतना बड़ा खेल हो रहा हो और किसी को पता ना हो यह अपने आप मे बड़ा सवाल है। अवैध खनन के इस खेल में रेल और खनन विभाग के आलाअधिकारी तक शामिल है और इसीलिए इस पूरे मामले में सभी मिलकर लीपापोती करने में लगे हैं।
गिट्टी की चोरी पकड़े जाने के बाद बड़े ही नाटकीय ढंग से कागजों के जरिये भी खेल किया जाता है। जिलाधिकारी के आदेश के बाद एक जांच रिपोर्ट तैयार की जाती है जिसमें खनन विभाग के तीन सदस्यों ने जांच के बाद स्टेशन मास्टर को लिखा है कि आपके स्टेशन परिसर में लगभग 3000 घन मीटर गिट्टी पाई गई जिसके कागजात मांगने पर उपलब्ध नही कराया जा सका है इसलिए यह संदिग्ध प्रतीत होता है। ऐसे में जिलाधिकारी के अग्रिम आदेश तक ये गिट्टी आपकी सुपुर्दगी में दी जाती है।
 

बिल्ली स्टेशन पर डंप ये अवैध गिट्टी यहां तक कैसे पहुंची और किसकी है यह न तो रेलवे विभाग के जिम्मेदार अफसर बता पा रहे और न ही खनन विभाग के। लगभग 300 गाड़ी गिट्टी क्रेशर से स्टेशन परिसर में डंप हो जाती है लेकिन विभाग के जिम्मेदार को कोई जानकारी नहीं हुई । मामला जब नवसत्ता ने उठाया तो हर कोई अपना दामन बचाने में जुट गया। जिलाधिकारी के आदेश पर खनन विभाग की टीम ने गिट्टी को अवैध व संदिग्ध बताते हुए स्टेशन मास्टर को पत्र लिखकर जबाब मांगा है।
वहीं स्टेशन मास्टर गिरीश कुमार इस पूरे मामले से पल्ला झाड़ते हुए खुद को अनजान बताने में जुटे हैं। नवसत्ता से फोन पर स्टेशन मास्टर ने जो कहा उससे ये साफ हो जाता है कि इतने बड़े राजस्व की चोरी का मामला है लेकिन स्टेशन मास्टर अन्जान ही बने हुए हैं। वो सीधे तौर पर खनन विभाग को ही इसके लिए दोषी बताते हैं और ज्यादा पूछताछ करने पर चोपन में बैठे मंडलीय अधिकारियों से बात करने को कहकर फोन काट देते हैं।
सवाल तो ये भी उठता हैं कि नक्सल प्रभावित जनपद में कोई कैसे बिना परमिशन के कोई इतनी बड़ी मात्रा में गिट्टी को स्टेशन परिसर में डंप कर चला जाता है,और स्टेशन की सुरक्षा में लगी जीआरपी आरपीएफ तक को इसकी जानकारी नहीं और ना ही स्टेशन मास्टर ने इस गिट्टी के डंपिंग को लेकर कोई जानकारी क्यों नहीं हासिल की
दरअसल इस पूरे खेल में सभी शामिल हैं और खुद के दामन को साफ-पाक करने में जुटे हैं । खनिज अधिकारी जेपी द्विवेदी फोन पर बताते हैं कि डीएम साहब जांच करा रहे हैं जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। द्विवेदी नवसत्ता को ये भी बताते हैं कि ये मामला कई सालों से चल रहा है और अगर पड़ताल होगी तो करीब डेढ़ – दो लाख घनमीटर गिट्टी के अवैध खनन और परिवहन का मामला बनता है इसके जरिए करीब 25-30 करोड़ तो रायल्टी की ही चोरी की गई है बाकी गिट्टी का जो वैल्यू प्राइस है सो अलग मतलब सैकड़ों करोड़ का खेल और जवाबदेह कोई नहीं। खनन अधिकारी जे पी द्विवेदी ने ये भी कहते हैं कि सोनभद्र में हजारों चोर घूम रहे है हम सब पर नजर तो नही रख सकते हम भी इंसान है आपकी तरह जब आपको चोरी का पता नहीं तो भला मुझे कैसे हो सकता है। विभाग ने कोई रडार नही दिया है हमें कि हम सब पर नजर रख सकें। लेकिन साथ में उन्होंने यह भी बताया कि चोरी कैसे हुई किस तरह से रात के अंधेरे में खदान से सटे स्टेशन पर गिट्टी को ले जाया गया होगा।
जब हमने इस पूरे मामले पर खनिज निदेशक रोशन जैकब से बात करनी चाही तो पहले तो उन्होंने दो दिन तक फोन नहीं उठाया और ना ही व्हाट्सएप पर भेजे मैसेज का ही कोई जवाब दिया तो हम उनसे मिलने उनके दफ्तर पहुंचे पहले तो घंटो उन्होंने बैठाये रखा और बाद में अपने निजी सचिव से मुख्य इंजीनियर से मिलवाने को कह दिया पर हमने बताया कि हमें कोई खनन पट्टे पर नहीं लेने हमें तो एक खबर पर उनकी रिएक्शन चाहिए, तब कहीं जाकर मोहतरमा हमसे मिलीं और जब हमने सारी बात बताई तो उन्होंने सोनभद्र के खनन अधिकारी जेपी द्विवेदी को अपने पीए से फोन लगवाया और फोन को स्पीकर पर लेकर मामले की जानकारी करने लगीं लेकिन जिस तरह से खनिज अधिकारी मामले को बताना चाहता था उसे खुद निदेशक महोदया ने ही बीच बीच में टोककर विषय से घुमाकर सारा ठीकरा रेलवे पर ही फोड़ने की कवायद में लगी रहीं, फोन काटने के बाद वो अपने अधिकारी को पाक साफ बताने और उसकी गलतियों पर पर्दा डालने में ही लगी रहीं।
 

यही नहीं निदेशक महोदया हमारी शिकायत से इतना तिलमिला गईं कि सोनभद्र के प्रशासन और पत्रकारों को दलाली करने वाला तक कह दिया पर मजाल क्या कि अपने खनन विभाग पर कोई आंच आने दी हो, आखिर में उन्होंने लाख वीडियो फोटो हों बातचीत के टेप हों कुछ भी ना सुनने को तैयार ना देखने को, उन्होंने डीएम सोनभद्र की रिपोर्ट के बाद ही कुछ बताने की हामी भरी , हां अपने अधिकारी से बात करते समय बीच में उन्होंने जो लोग भी इस केल में शामिल हों उनके खिलाफ एफआईार दर्ज कराने के आदेश जरूर दिए।  कुल मिलाकर निदेशक और खनिज अधिकारी की बातों और निदेशक के व्यवहार से ये साफ हो गया कि सोनभद्र में अवैध खनन को लेकर जो भी चल रहा है उसमें शामिल सभी हैं और इसकी जानकारी भी सभी को है, इस खेल का भांडा मीडिया में कैसे आ गया इसका गुस्सा है ना कि रायल्टी वसूलने और किसी तरह की त्वरित कार्रवाई करने का।

 

जो भी हो पड़ताल में अब तक दोनों रेल और खनिज विभाग के अधिकारी बेनकाब तो हो ही चुके हैं।  जिला प्रशासन की जांच अभी आनी बाकी है। प्रशासन की रिपोर्ट आने के बाद भी हमारी पड़ताल जारी रहेगी और इस अवैध खनन के खेल में सरकारी रायल्टी और रेवेन्यू की चोरी करने वालों को बेनकाब करने में हम कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे।

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